Thursday, 10 November 2011

एक शान नज़र सी रोशन कोई नज़र नहीं देखि

मैंने यह सच है के आज तक उल्फ़ते नहीं देखि


तेरे हुस्रना सो ओह माँ मरियम जहाँ में कोन है हसीं


मैंने तेरी आँखों में जहाँ भर की शाफ्फकते हैं देखि


बड़ी मुहब्बतें हैं इन आँखों में के मै तेरी हो गयी


इन प्यार भरे नज़रो के सहर में खो गई


हज़ार जन्नतों से हसीं एहसास हैं यह आँखे


जिनके लिए पढने को मुझे कोई आयत नहीं मिलती


माँ मरियम तेरे से हसीं मुझे कोई और माँ नहीं मिलती


...........................ऋतू



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