तेरी रहमतो से आज भी दिल बेज़ार है
एक उम्र हो चली अब भी तेरे करम का इंतज़ार है
मायूसियाँ गुनाह हैं तेरे वसीले में
तेरे सजदे से मुझे आज कब इनकार है
फनाह होने चली आज रूह जिस्म से मेरे
तुझे आज फिर भी मुझसे कुछ और दरकार है
ए खुदा मेरे सिर को जो सजदे तेरे पडा
तेरी मुहबतों भरी दुआओं का इंतज़ार है
ॐ साईं राम
एक उम्र हो चली अब भी तेरे करम का इंतज़ार है
मायूसियाँ गुनाह हैं तेरे वसीले में
तेरे सजदे से मुझे आज कब इनकार है
फनाह होने चली आज रूह जिस्म से मेरे
तुझे आज फिर भी मुझसे कुछ और दरकार है
ए खुदा मेरे सिर को जो सजदे तेरे पडा
तेरी मुहबतों भरी दुआओं का इंतज़ार है
ॐ साईं राम

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